पुव-सागरेर पार हते कोन् एल परवासी
Pub sagorer par hote
प्रकृति
पुव-सागरेर पार हते कोन् एल परवासी–
शून्ये वाजाय़ घन घन हाओय़ाय़ हाओय़ाय़ सन सन
साप खेलावार वाँशि॥
सहसा ताइ कोथा हते कुलु कुलु कलस्रोते
दिके दिके जलेर धारा छुटेछे उल्लासी॥
आज दिगन्ते घन घन गभीर गुरु गुरु डमरुरव हय़ेछे ओइ शुरु।
ताइ शुने आज गगनतले पले पले दले
दले
अग्निवरन नाग नागिनी छुटेछे उदासी॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Pub saagorer paar hote kon elo parobasi - Shunne baajay ghano ghano haaway haaway sano sano Saap khelaabar bnaashi. Sahosa taai kotha hote kulu kulu kalosrote Dike dike jaaler dhaara chhutechhe ullaasi. Aaj digantte ghano ghano gobhir guru guru damarur rab hoyechhe oi shuru. Taai shune aaj gagontale pale pale dale dale Ognibaron naag nagini chhutechhe udaasi.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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