पूर्वाचलेर पाने ताकाइ
Purbachaler pane takai
प्रकृति
पूर्वाचलेर पाने ताकाइ अस्ताचलेर धारे आसि।
डाक दिय़े यार साड़ा ना पाइ तार लागि आज वाजाइ वाँशि॥
यखन ए कूल याव छाड़ि
पारेर खेय़ाय़ देव पाड़ि,
मोर फागुनेर गानेर वोझा वाँशिर साथे यावे
भासि॥
सेइ-ये आमार वनेर गलि रङिन फुले छिल आँका
सेइ फुलेरइ छिन्न दले चिह्न ये तार पड़ल ढाका।
माझे माझे कोन्
वातासे चेना दिनेर गन्ध आसे,
हठाৎ वुके चमक लागाय़ आध-भोला सेइ कान्नाहासि॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Purbachalero paane taakai astachalero dhaare aasi. Daak diye jaar saara na paai taar laagi aaj baajai bnaashi. Jakhon e kul jaabo chhari paarer kheya debo paari, Mor phaaguner gaaner bojha bnaashir saathe jaabe bhaasi. Sei je aamar boner goli rongin phule chhilo aanka Sei phuleri chhinno dale chinho je taar porlo dhaaka. Maajhe maajhe kon baatase chena diner gandho aase, Hatthat buke chamok laagay aadh-bhola sei kaannahaasi.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रकृति · 259(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- बसन्त(বসন্ত)
- राग
- कफ़ि(কাফি)
- ताल
- कहर्व(কাহারবা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- ऋतु
- बरसात(বর্ষা)
- प्रकाशित
- भरति(ভারতী)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन १५ (नबगीतिक) / २(স্বরবিতান ১৫ (নবগীতিকা) / ২)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 24 March 1922(১০ চৈত্র ১৩২৮)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।