पूर्णचाँदेर माय़ाय़ आजि
Purnochader mayay aji
प्रकृति
पूर्णचाँदेर माय़ाय़ आजि भावना आमार पथ भोले,
येन सिन्धुपारेर पाखि तारा या य़ या य़ याय़
चले॥
आलोछाय़ार सुरे अनेक कालेर से कोन् दूरे
डाके आ य़ आ य़ आय़ व’ले॥
येथाय़ चले गेछे आमार हारा फागुनराति
सेथाय़ तारा फिरे फिरे खोँजे आपन साथि।
आलोछाय़ाय़ येथा अनेक दिनेर से कोन् व्यथा
काँदे हा य़
हा य़ हाय़ व’ले॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Purnochnaander maayay aaji bhaabna aamar poth bhole, Jeno sindhupaarer paakhi taara jaay jaay jaay chole. Aalochhaayar sure anek kaaler se kon dure Daake aay aay aay bole. Jethay chole gechhe aamar haara phagunraati Sethay taara phire phire khnoje aapon saathi Aalochhaayay jetha anek diner se kon byatha Knaade haay haay haay bole.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1921(১৩২৮)
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