पूर्ण प्राणे चावार याहा
Purno prane chabar
प्रेम
पूर्ण प्राणे चावार याहा रिक्त
हाते चास ने तारे,
सिक्तचोखे यास ने द्वारे॥
रत्नमाला आनवि
यवे माल्यवदल तखन हवे–
पातवि कि तोर देवीर आसन शून्य
धुलाय़ पथेर धारे॥
वैशाखे वन रुक्ष यखन, वहे पवन
दैन्यज्वाला,
हाय़ रे तखन शुकनो फुले भरवि कि
तोर वरणडाला।
अतिथिरे डाकवि
यवे डाकिस येन सगौरवे,
लक्ष शिखाय़ ज्वलवे यखन दीप्त
प्रदीप अन्धकारे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Purno praane chaabar jaaha rikto haate chaasne taare, Siktochokhe jaasne dwaare. Ratnomaala aanbi jabe maallobadol takhon habe - Paatbi ki tor debir aason shunyo dhular pather dhaare. Boishakhe bon rukkho jakhon, bahe pabon doinnojwala, Haay re takhon shukno phule bhorbi ki tor barondaala. Otithire daakbi jabe daakis jeno sagourabe, Lokkho shikhay jwolbe jakhon dipto prodip andhokare.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1928(১৩৩৫)
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