सघन गहन रात्रि
Saghana gahana ratri
प्रकृति
सघन गहन
रात्रि, झरिछे श्रावणधारा–
अन्ध विभावरी सङ्गपरशहारा॥
चेय़े थाकि ये शून्ये अन्यमने
सेथाय़ विरहिणीर अश्रु
हरण करेछे ओइ तारा॥
अशत्थपल्लवे वृष्टि झरिय़ा मर्मरशव्दे
निशीथेर अनिद्रा देय़ ये भरिय़ा।
माय़ालोक
हते छाय़ातरणी
भासाय़ स्वप्नपारावारे– नाहि तार किनारा॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Saghano gahono raatri, jhoriche shraabonodhaara - Andho bibhabori sangoparosohaara. Cheye thaaki je sunne onnomone Sethay birohinir aasru harono karechhe oi taara. Ashathhopallobe bristi jhoriya marmaroshabde Nisither anidra dey je bhoriya. Maayaloko hote chhaayataroni Bhaasay swapnopaarabare - Naahi taar kinara.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1939(১৩৪৬)
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