সকলি ফুরাল, স্বপনপ্রায়,
Sakali phuralo swapanopray
Kaal Mrigaya Kaal Mrigaya से · दृश्य 6
सकलि फुराल, स्वपनप्राय়, कोथा से लुकाल, कोथा से हाय় ! कुसुमकानन हय়ेछे म्लान, पाखीरा केन रे गाहे ना गान, ओ !सव हेरि शून्यमय়, कोथा से हाय় ! काहार तरे आर फुटिवे फुल, माधवी मालती केँदे आकुल, सेइ ये आसित तुलिते जल, सेइ ये आसित पाड়िते फल, ओ !से आर आसिवे ना, कोथा से हाय় !
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sakoli phuralo, swapan-praay, Kotha se lukalo, kotha se haay. Kusumokanon hoyechhe mlaan, Paakhira keno re gaahe na gaan, O sab heri shunnomoy - Kotha se haay! Kahaar tare aar phutibe phul, Maadhobi maaloti knede aakul! Sei je aasito tulite jol, Sei je aasito paarite phal, O se aar aasibe na - Kotha se haay!
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- संकलन
- Kaal-mrigaya
- स्वरबितान खण्ड
- 29
- स्वरलिपि
- Indira Debi Chowdhurani
- रचनाकाल
- 1882(১২৮৯)
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