से ये वाहिर हल आमि जानि
Se je bahir holo
प्रेम
से
ये वाहिर हल आमि जानि,
वक्षे आमार
वाजे ताहार पथेर वाणी॥
कोथाय़ कवे एसेछे से सागरतीरे, वनेर शेषे,
आकाश
करे सेइ कथारइ कानाकानि॥
हाय़ रे,
आमि घर वेँधेछि एतइ दूरे,
ना जानि
तार आसते हवे कत घुरे।
हिय़ा आमार पेते रेखे साराटि पथ दिलेम ढेके,
आमार व्यथाय़ पड़ुक ताहार चरणखानि॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Se je baahir holo aami jaani, Bokkhe aamar baaje taahar baani. Kothay kabe esechhe se saagorotire, bonero sheshe, Aakash kare sei kathari kaanakaani. Haay re, aami ghar bnedhechhi etoi dure, Naa jaani taar aaste habe kato ghure. Hiya aamar pete rekhe saarati path dilem dheke, Aamar byathay poruk tahar charonkhaani.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रेम · 289(প্রেম)
- उप-पर्याय
- प्रेम्-बोइचित्र(প্রেম্-বোইচিত্র)
- राग
- पिलु(পিলু)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ३४ (गीतबिथिक)(স্বরবিতান ৩৪ (গীতবীথিকা))
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1918(১৩২৫)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।