से कोन् पागल याय़ पथे तोर
Se kon pagol jay
विचित्र
से कोन् पागल याय़ पथे तोर, याय़ चले ओइ एकला राते– तारे डाकिस ने तोर आङिनाते॥ सुदूर देशेर वाणी ओ ये याय़ याय़ वले, हाय़, के ता वोझे– की सुर वाजाय़ एकताराते॥ काल सकाले रइवे ना रइवे ना तो, वृथाइ केन आसन पातो। वाँधन-छेँड़ार महोৎसवे गान ये ओरे गाइते हवे नवीन आलोर वन्दनाते॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Se kon paagol jaay jaay pathe tor, jaay chole oi ekla raate - Taare daakis ne tor aanginate. Sudur desher baani o je jaay jaay bale, haay, ke ta bojhe - Ki sur baajay ektarate. Kaal sakale raibe na raibe na to, Brithai keno aason paato. Bnaadhon-chnerar mahotsabe Gaan je ore gaaite habe, Nabin aalor bandanate.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 24 August 1926(৮ ভাদ্র ১৩৩৩)
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