शरत-आलोर कमलवने (एइ शरत-आलोर कमलवने)
Sharat alor kamalabone
प्रकृति
शरत-आलोर
कमलवने,
वाहिर हय़े विहार करे ये छिल मोर मने मने॥
तारि
सोनार काँकन वाजे आजि प्रभात-किरण-माझे,
हाओय़ाय़
काँपे आँचलखानि–छड़ाय़ छाय़ा क्षणे क्षणे॥
आकुल केशेर परिमले
शिउलिवनेर उदास वाय़ु पड़े थाके तरुतले।
हृदय़माझे
हृदय़ दुलाय़, वाहिरे से भुवन भुलाय़–
आजि से
तार चोखेर चाओय़ा छड़िय़े दिल नील गगने॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sharoto aalor kamolobone Baahiro hoye biharo kore je chilo mor mone mone. Taari sonar knaakon baaje aaji probhatokirano maajhe, Haaway knaape aachalkhaani charay chhaaya khone khone. Aakul kesher porimale Shiuliboner udas baayu pore thaake tarutale. Hridoyomaajhe hridoyo dulay, baahire se bhubano bhulay - Aaji se taar chokher chaawa chhoriye dilo neel gagone.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 27 August 1914(১১ ভাদ্র ১৩২১)
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