आवार श्रावण हये एले फिरे,
Shraban hoye ele phire
प्रकृति
आवार श्रावण हये एले फिरे, मेघ-आँचले निले घिरे ॥ सूर्य हाराय, हाराय तारा आँधारे पथ हय-ये हारा, टेउ दियेछे नदीर नीरे ॥ सकल आकाश, सकल धरा वर्षगेरइ-वाणी-भरा । झरो झरो धाराय माति वाजे आमार आँधार राति, वाजे आमार शिरे शिरे ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aabar shraabon hoye ele phire, Megh aanchole nile ghire. Surjo haaray, haaray taara aandhare path hoy-je haara, Dheu diyechhe nodir nire. Sakol aakash, sakol dhara barsoneri-baani-bhara. Jharo jharo dhaaraya maati baaje aamar aadhar raati, Baaje aamar shire shire.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 12 September 1914(২৭ ভাদ্র ১৩২১)
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