শ্রাবণের ধারার মতো পড়ুক ঝরে
Shrabaner dharar mato
Puja
श्रावणेर धारार मतो पड़ुक झरे, पड़ुक झरे
तोमारि सुरटि आमार मुखेर ’परे, वुकेर ’परे॥
पुरवेर आलोर साथे पड़ुक प्राते दुइ नय़ाने–
निशीथेर अन्धकारे गभीर धारे पड़ुक प्राणे।
निशिदिन एइ जीवनेर सुखेर ’परे, दुखेर ’परे
श्रावणेर धारार मतो पड़ुक झरे, पड़ुक झरे॥
ये शाखाय़ फुल फोटे ना, फल धरे ना एकेवारे,
तोमार ओइ वादल-वाय़े दिक जागाय़े सेइ शाखारे।
या-किछु जीर्ण आमार, दीर्ण आमार, जीवनहारा,
ताहारि स्तरे स्तरे पड़ुक झरे सुरेर धारा।
निशिदिन एइ जीवनेर तृषार ’परे, भुखेर ’परे
श्रावणेर धारार मतो पड़ुक झरे, पड़ुक झरे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Shraaboner dhaarar moto poruk jhore, poruk jhore Tomari surti aamar mukher pare, buker pare. Puraber aalor saathe poruk praate dui noyaane - Nishither andhakare gobhir dhaare poruk praane. Nishidin ei jiboner sukher pare dukher pare. Shraaboner dhaarar moto poruk jhore, poruk jhore. Je shakhay phul phote naa, phal dhare naa ekebaare, Tomar oi baadol baaye dik jaagaye sei shaakhaare. Ja kichhu jirno aamar, dirno aamar, jibonhaara, Tahari stare stare poruk jhore surer dhaara. Nishidin ei jiboner trishar pare, bhukher pare Shraaboner dhaarar moto poruk jhore, poruk jhore.
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- पर्याय
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- स्थान
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- स्वरबितान खण्ड
- 11 (Ketaki)
- स्वरलिपि
- Dinendranath Tagore
- रचनाकाल
- 9 March 1914(২৫ ফাল্গুন ১৩২০)
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