श्रावणेर पवने आकुल विषण्ण सन्ध्याय़
Shrabaner pabane akul
प्रेम
श्रावणेर पवने आकुल विषण्ण सन्ध्याय़ साथिहारा घरे मन आमार प्रवासी पाखि फिरे येते चाय़ दूरकालेर अरण्यछाय़ातले। की जानि सेथा आछे किना आजओ विजने विरही हिय़ा नीपवनगन्धघन अन्धकारे– साड़ा दिवे कि गीतहीन नीरव साधनाय़॥ हाय़, जानि से नाइ जीर्ण नीड़े, जानि से नाइ नाइ। तीर्थहारा यात्री फिरे व्यर्थ वेदनाय़– डाके तवु हृदय़ मम मने-मने रिक्त भुवने रोदन-जागा सङ्गीहारा असीम शून्ये शून्ये॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Shraboner pabone aakul bishanno sondhyay Saathihaara ghore mon aamar Probasi paakhi phire jete chaay Durkaaler aronnyochhaayatale. Ki jaani setha aachhe kina aajo bijane birohi hiya Nipobonogandhoghano andhokare - Saara dibe ki gatihin nirabo saadhonay. Haay, jaani se naai jirno nire, jaani se naai naai. Tirthohaara jaatri phire byartho bedonay - Daake tobu hriday mamo mone-mone rikto bhubane Rodano-jaaga songihaara asim sunnye sunnye.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1937(১৩৪৪)
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