श्रावणमेघेर आधेक दुय़ार
Shrabanmegher adhek duar
प्रकृति
श्रावणमेघेर आधेक दुय़ार ओइ खोला, आड़ाल थेके देय़ देखा कोन् पथ-भोला॥ ओइ-ये पूरव-गगन जुड़े उत्तरी तार याय़ रे उड़े, सजल हाओय़ार हिन्दोलाते देय़ दोला॥ लुकावे कि प्रकाश पावे केइ जाने– आकाशे कि धराय़ वासा कोन्खाने। नाना वेशे क्षणे क्षणे ओइ तो आमार लागाय़ मने परशखानि नाना-सुरेर-ढेउ-तोला॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Shraabonmegher aadhek duar oi khola, Aarale theke dey dekha kon path bhola. Oi je purab gagon jure uttari taar jaay re ure, Sajol haawar hindolate dey dola. Lukabe ki prokash paabe kei jaane - Aakash ki dharay baasa konkhane. Naana bese khaane khane oi to aamar laagay mone Paroshkhani naana surer dheu tola.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 3 July 1922(১৯ আষাঢ় ১৩২৯)
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