শুভ কর্মপথে ধর’ নির্ভয় গান
Shubho karmapothe dharo
Swadesh
शुभ कर्मपथे धर’ निर्भय़ गान।
सव दुर्वल संशय़ होक अवसान॥
चिर- शक्तिर निर्झर नित्य झरे
लह’ से अभिषेक ललाट ’परे।
तव जाग्रत निर्मल नूतन प्राण
त्यागव्रते निक दीक्षा,
विघ्न हते निक शिक्षा—
निष्ठुर
सङ्कट दिक सम्मान।
दुःखइ होक तव वित्त महान।
चल’ यात्री, चल’ दिनरात्रि—
कर’ अमृतलोकपथ अनुसन्धान।
जड़तातामस हओ उत्तीर्ण,
क्लान्तिजाल कर’ दीर्ण विदीर्ण—
दिन-अन्ते अपराजित चित्ते
मृत्युतरण तीर्थे कर’ स्नान॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Shubho karmopathe dharo nirbhay gaan. Sab durbal sanshay hok abosaan. Chiro- shoktir nirjhar nityo jhare Laho se obhishek lalato pare. Tabo jaagroto nirmalo nutano praan. Tyagobrote nik dikkha, Bighno hote nik shikkha - Nisthur sankat dik samman. Dukkhoi hok tabo bitto mohan. Chalo jaatri chalo dinraatri - Karo amritolokopath onusandhan. Jarotatamos haw uttirna, Klaantijaal karo dirno bidirna - Din-ante aporajito chitte Mrityutaron tirthe karo snaan.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Swadesh · 40(স্বদেশ)
- ताल
- Kaharwa(কাহারবা)
- स्वरबितान खण्ड
- 47
- स्वरलिपि
- Shantideb Ghosh
- रचनाकाल
- 1937(১৩৪৪)
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