शुक्नो पाता के ये छड़ाय़ ओइ दूरे
Shukno pata ke je
प्रकृति Basanta से
दखिनहाओय়ा - शुकनो पाता के ये छड়ाय় ओइ दूरे उदास करा कोन् सुरे । घरछाड়ा ओइ के वैरागी जानि ना ये काहार लागि क्षणे क्षणे शून्य वने याय় घुरे । चिनि चिनि हेन ओरे हय় मने, फिरे फिरे येन देखा ओर सने । छद्मवेशे केन खेल, जीर्ण ए वास फेलो फेलो, प्रकाश करो चिरनूतन वन्धुरे ।
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Shukno paata ke je chharay oi dure udas-kara kon sure. Gharchhaara oi ke boiragi jaanina je kaahar laagi Khane khane sunyo bone jaay ghure. Chini chini heno ore hoy mone, Phire phire jeno dekha or sone. Chhadmabeshe keno khelo, jirno e baas phelo phelo - Prokash karo chiranutan bondhure.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रकृति · 224(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- बसन्त(বসন্ত)
- राग
- मुल्तनि(মুলতানি)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- ऋतु
- बरसात(বর্ষা)
- संकलन
- बसन्त(বসন্ত)
- स्थान
- शांतिनिकेतन(শান্তিনিকেতন)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ६ (बसन्त)(স্বরবিতান ৬ (বসন্ত))
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 9 February 1923(২৭ মাঘ ১৩২৯)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।