श्यामल शोभन श्रावण, तुमि नाइ वा गेले
Shyamalo shobhan shraban
प्रकृति
श्यामल
शोभन श्रावण, तुमि नाइ वा गेले
सजल विलोल आँचल मेले॥
पुव हाओय़ा
कय़, ‘ओर ये समय़ गेल चले।’
शरৎ वले,
‘भय़ की समय़ गेल वले,
विना काजे आकाश-माझे काटवे वेला असमय़ेर खेला खेले।’
कालो मेघेर आर कि आछे दिन
ओ ये हल साथिहीन।
पूव-हाओय़ा कय़, ‘कालोर
एवार याओय़ाइ भालो।’
शरৎ वले, ‘मिलवे युगल कालोय़ आलो,
साजवे वादल सोनार साजे आकाश-माझे कालिमा ओर घुचिय़े फेले।’ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Shyamol shobhon shraabon tumi naai ba gele Sajol bilol aanchol mele. Pub haawa koy, ‘or je samay gelo chole.’ Sharot bole, ‘bhoy ki samay gelo bole, Bina kaaje aakash-maajhe kaatbe bela asomayer khela khele’. Kaalo megher aar ki aachhe din. O je holo saathihin. Pub haawa koy, ‘kaalor ebar jaayoai bhaalo.’ Sharot bole, ‘milbe jugol kaaloy aalo, Saajbe baadol sonaar saaje aakash maajhe kaalima or ghuchiye phele’.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1925(১৩৩২)
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