साधेर अरण्य हल श्मशान
Sahe na sahe na
वाल्मीकि प्रतिभा Valmiki Pratibha से · दृश्य 1
सहे ना सहे ना काँदे परान । साधेर अरण्य हल श्मशान ॥ दस्युदले आसि शान्ति करे नाश, त्रासे सकल दिश कम्पमान । आकुल कानन, काँदे समीरण, चकित मृग, पाखि गाहे ना गान ॥ श्यामल तृणदल, शोणिते भासिल, कातर रोदन-रवे फाटे पाषाण । देवी दुर्गे, चाहो, त्राहि ए वने— राखो अधीनी जने, करो शान्ति दान ।
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sahe na, sahe na, knaade paran. Saadher aronyo holo shashaan. Dashyudale aasi shaanti kare naash, Traase sakol dish kampomaan. Aakul kanon, knaade somiran, Chakito mrigo, paakhi gahe na gaan. Shyamolo trinodal shonite bhaasilo, Kator rodanorabe phaate paashan. Debi durge, chaaho, trahi e bane, Raakho adhini jane, karo shaanti daan.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1886(১২৯৩)
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