सकाल-वेलार कुँड़ि आमार विकाले याय़ टुटे
Sakal belar kuri amar
विचित्र
सकाल-वेलार कुँडि आमार विकाले याय टुटे, माझखाने हय हय नि देखा उठल यखन फुटे ॥ झरा फुलेर पापडिगुलि धुलो थेके आनिस तुलि, शुकनो पातार गाँथव माला हृदयपत्रपुटे ॥ यखन समय छिल दिल फाँकि— एखन आन् कुडाये दिनेर शेषे असमयेर छिन्न वाकि । कृष्णरातेर चाँदेर कणा आँधारके देय ये सान्त्वना ताइ निये मोर मिटुक आशा— स्वपन गेछे छुटे ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sakal belar knuri aamar bikale jaay tute, Maajkhaane haay hoy ni dekha uthlo jakhon phute Jhara phuler paapriguli dhulo theke aanis tuli, Shukno paatar gnaathbo maala hridoypatropute. Jakhon somoy chhilo dilo phnaaki - Ekhon aan kuraaye diner shese aasomoyer chhinno baaki. Krishnoraater chnaader kanaa aandharke dei je santona Taai niye mor mituk aasha - swapon gechhe chhute.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 6 October 1926(২০ আশ্বিন ১৩৩৩)
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