स्वर्णवर्णे समुज्ज्वल नव चम्पादले
Swarnabarne samujjwal
चण्डालिका Chandalika से · दृश्य 2
स्वर्णवर्णे समुज्ज्वल नव चम्पादले वन्दिव श्रीमुनीन्द्रेर पादपद्मतले । पुण्यगन्धे पूर्ण वाय়ु हल सुगन्धित, पुष्पमाल्ये करि ताँर चरण वन्दित ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Swarnobarne samujjal nabo champadale Bondibo shrimunindrer padopaddotale. Punyogandhe purno baayu holo sugondhito, Puspomaalle kori taar charon bondito.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years. / दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1938(১৩৪৫)
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