तार अन्त नाइ गो ये आनन्दे
Tar anto nai go
पूजा
३१२
तार अन्त नाइ गो ये आनन्दे गड़ा आमार अङ्ग।
तार अणु-परमाणु पेल कत आलोर सङ्ग,
ओ तार अन्त नाइ गो नाइ।
तारे मोहनमन्त्र दिय़े गेछे कत फुलेर गन्ध
तारे दोला दिय़े दुलिय़े गेछे कत ढेउय़ेर छन्द,
ओ तार अन्त नाइ गो नाइ।
आछे कत सुरेर सोहाग ये तार स्तरे स्तरे लग्न,
से
ये कत रङेर रसधाराय़ कतइ हल मग्न,
ओ तार अन्त नाइ गो नाइ।
कत शुकतारा ये स्वप्ने ताहार रेखे गेछे
स्पर्श,
कत वसन्त ये ढेलेछे ताय़ अकारणेर हर्ष,
ओ तार अन्त नाइ गो नाइ।
से
ये प्राण पेय़ेछे पान करे युग-युगान्तरेर स्तन्य–
भुवन कत तीर्थजलेर धाराय़ करेछे ताय़ धन्य,
ओ तार अन्त नाइ गो नाइ।
से
ये सङ्गिनी मोर, आमारे से दिय़ेछे वरमाल्य।
आमि धन्य, से मोर अङ्गने ये कत प्रदीप
ज्वालल–
ओ तार अन्त नाइ गो नाइ॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Taar anto naai go je anande gara aamar ango. Tar anu paramanu pelo kato aalor sango, O taar anto naai go naai. Taare mohonmantra diye gechhe kato phuler gandho, Taare dola diye duliye gechhe kato dheuyer chhando, O taar anto naai go naai. Aachhe kato surer sohag je taar stare stare lagno, Se je kata ranger rasodhaaray katoi holo magno, O taar anto naai go naai. Kato shuktara je swapne taahar rekhe gechhe sparsho, Kato basanto je dhelechhe taay akaraner harsho, O taar anto naai go naai. Se je praan peyechhe paan kare jug-jugantarer stanyo - Bhuban kato tirthajaler dhaaray korechhe taay dhanyo, O taar anto naai go naai. Se je soangini mor, aamare se diyechhe barmalyo. Aami dhanyo, se mor angane je kato prodip jaallo - O taar anto naai go naai.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 312(পূজা)
- उप-पर्याय
- आनोन्दो(আনোন্দো)
- राग
- बौल्-सुर(বাউল-সুর)
- ताल
- एक्ताल(একতাল)
- घराना
- शास्त्रीय और क्षेत्रीय रूप(শাস্ত্রীয় ও আঞ্চলিক রূপ)
- संकलन
- गीतिमाल्य(গীতিমাল্য)
- स्थान
- शांतिनिकेतन(শান্তিনিকেতন)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ४१(স্বরবিতান ৪১)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 18 April 1914(৫ বৈশাখ ১৩২১)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।