तिमिरमय़ निविड़ निशा
Timiramoy nibiro nisha
विचित्र
तिमिरमय़ निविड़ निशा नाहि रे नाहि दिशा– एकेला घनघोर पथे, पान्थ कोथा याओ॥ विपद दुख नाहि जानो, वाधा किछु ना मानो, अन्धकार हतेछ पार– काहार साड़ा पाओ॥ दीप हृदय़े ज्वले, निवे ना से वाय़ुवले– महानन्दे निरन्तर ए की गान गाओ। समुखे अभय़ तव, पश्चाते अभय़रव– अन्तरे वाहिरे काहार मुख चाओ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Timiromayo nibiro nisha naahi re naahi disha- Ekela ghanoghor pathe paantho kotha jaao. Bipod dukh naahi jaano, baadha kichhu na maano, Andhokar hotechho paar kahar saara paao. Dip hridoye jwale, nibe na se bayubale- Mahanande nirantar eki gaan gaao. Samukhe abhoy tabo, poschate abhoyorabo- Antore bahire kaahar mukhe chaao.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 - रचनाकाल
- 1910(১৩১৭)
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