तोमारि इच्छा हउक पूर्ण करुणामय़ स्वामी
Tomari ichcha houk purno
पूजा
तोमारि इच्छा हउक पूर्ण करुणामय़ स्वामी।
तोमारि प्रेम स्मरणे राखि, चरणे राखि आशा–
दाओ दुःख, दाओ ताप, सकलइ सहिव आमि॥
तव प्रेम-आँखि सतत जागे, जेनेओ ना जानि।
ओइ मङ्गलरूप भुलि, ताइ शोकसागरे नामि॥
आनन्दमय़ तोमार विश्व शोभासुखपूर्ण,
आमि आपन दोषे दुःख पाइ वासना-अनुगामी॥
मोहवन्ध छिन्न करो कठिन आघाते,
अश्रुसलिलधौत हृदय़े थाको दिवसयामी॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Tomari ichchha hauk purna karunamay swami. Tomari prem smarone raakhi, charone rakhi asha- Daao dukkha, daao taap, sakoli sohibo aami. Tabo prem-aankhi satato jaage, jeneo na jaani. Anondomoy tomar bishwa shobhasukhopurno, Aami aapon doshe dukkho paai baasona-anugami. Mohabandha chinna karo kothin aaghate, Oshrusalildhouta hriday thaako dibasojami.
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- कांगालिचरण सेन / दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1888(১২৯৫)
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