তরুতলে ছিন্নবৃন্ত মালতীর ফুল
Torutale chinnobrinto
Natyageeti
तरुतले छिन्नवृन्त मालतीर फुल— मुदिय़ा आसिछे आँखि तार, चाहिय़ा देखिल चारि धार॥ शुष्क तृणराशि-माझे एकेला पड़िय़ा, चारि दिके केह नाइ आर— निरदय़ असीम संसार॥ के आछे गो दिवे तार तृषित अधरे एकविन्दु शिशिरेर कणा— केह ना, केह ना॥ मधुकर काछे एसे वले, ‘मधु कइ। मधु चाइ, चाइ।’ धीरे धीरे निश्वास फेलिय़ा फुल वले, ‘किछु नाइ, नाइ।’ ‘फुलवाला, परिमल दाओ’ वाय़ु आसि कहितेछे काछे। मलिन वदन फिराइय़ा फुल वले, ‘आर की वा आछे।’ मध्याह्नकिरण चारि दिके खरदृष्टे चेय़े अनिमिखे— फुलटिर मृदु प्राण हाय़, धीरे धीरे शुकाइय़ा याय़॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Torutale chinnobrinto maalotir phul- Mudiya aasichhe aankhi taar, chaahiya dekhilo chaari dhaar. Shusko trinoraashi-maajhe ekela poriya, Chaari dike keho naai aar- niradoy asim sangsar. Ke aachhe go dibe taar trishito adhore Ekbindu shishirer kana - Keho na, keho na. Modhukar kaachhe ele bale, ‘Modhu koi! modhu chaai, chaai.’ Dhire dhire nishwas pheliya phul bale, ‘Kichhu naai,naai.’ ‘Phulbaala, porimal daao’ baayu aasi kohitechhe kaachhe. Molin badon phiraiya phul bale, ‘Aar ki ba aachhe.’ Modhyahnokiran chaari dike kharodriste cheye animikhe - Phultir mridu praan haay, Dhire dhire shukaiya jaay.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Natyageeti · 21(নাট্যগীতি)
- राग
- Gour-Sarang
- ताल
- Jhaptaal(ঝাঁপতাল)
- संकलन
- Rudrachanda
- स्वरबितान खण्ड
- 20
- स्वरलिपि
- Indira Debi Chowdhurani
- रचनाकाल
- 1881(১২৮৮)
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