आधेक घुमे नय़न चुमे
Adhek ghume nayan chume
विचित्र
आधेक घुमे नय़न चुमे
स्वपन दिय़े याय़।
श्रान्त भाले यूथीर
माले परशे मृदु वाय़॥
वनेर छाय़ा मनेर साथि, वासना नाहि किछु–
पथेर धारे आसन पाति,
ना चाहि फिरे पिछु–
वेणुर पाता मिशाय़ गाथा नीरव भावनाय़॥
मेघेर खेला गगनतटे अलस लिपि-लिखा,
सुदूर कोन् स्मरणपटे जागिल मरीचिका।
चैत्रदिने तप्त वेला तृण-आँचल पेते
शून्यतले गन्ध-भेला भासाय़
वातासेते–
कपोत डाके मधूकशाखे विजन वेदनाय़॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aadheko ghume nayono chume swapono diye jaay. Shraanto bhaale juthiro maale parose mridu baay. Bonero chhaaya monero saathi baasona naahi kichhu - Pather dhaare aasono paati, na chaahi phire pichhu - Benur paata mishay gaatha nirabo bhaabonay. Megher khela gagonotate alaso lipi-likha, Suduro kon smaronopate jaagilo morichika. Choitrodine tapto bela trino aanchol pete Shunyotale gandho-bhela bhaasay baatasete - Kapoto daake modhukoshaakhe bijano bedonay.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- विचित्र · 93(বিচিত্র)
- राग
- मिश्र-सोहिनि(মিশ্র-সোহিনী)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- प्रकाशित
- बोइकलि, प्रोबसि, भद्र, १३३३(বোইকলি, প্রোবসি, ভদ্র, ১৩৩৩)
- स्थान
- शांतिनिकेतन(শান্তিনিকেতন)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन १(স্বরবিতান ১)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 8 April 1926(২৫ চৈত্র ১৩৩২)
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