आज ज्योৎस्नाराते सवाइ गेछे वने
Aj jyotsnarate sobai
पूजा
आज ज्योৎस्नाराते सवाइ गेछे वने
वसन्तेर एइ माताल समीरणे॥
याव ना गो याव ना ये, रइनु पड़े घरेर माझे–
एइ निरालाय़ रव आपन कोणे।
याव ना एइ माताल समीरणे॥
आमार ए घर वहु यतन क’रे
धुते हवे मुछते हवे मोरे।
आमारे ये जागते हवे, की जानि से आसवे कवे
यदि आमाय़ पड़े ताहार मने
वसन्तेर एइ माताल समीरणे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaj jyotsnaraate sobai gechhe bone Basonter ei maatal somirone. Jaabo na go jaabo na je, roinu pore ghorer maajhe - Ei niralay rabo aapon kone. Jaabo na ei maatal somirone. Aamar e ghor bohu jaton kore Dhute hobe muchhte hobe more. Aamare je jaagte hobe, ki jaani se aasbe kabe Jodi aamay pore taahar mone Basonter ei maatal somirone.
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- प्रकाशित
- अनन्द सन्गीत्' पत्रिक अग्रहयन्, १३२५(অনন্দ সন্গীত্' পত্রিক অগ্রহযন্, ১৩২৫)
- स्थान
- शांतिनिकेतन(শান্তিনিকেতন)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ४०(স্বরবিতান ৪০)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 19 March 1914(৫ চৈত্র ১৩২০)
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