আজি এ ভারত লজ্জিত হে
Aji e bharat lojjito
Swadesh
आजि ए भारत लज्जित हे,
हीनतापङ्के मज्जित हे॥
नाहि पौरुष, नाहि
विचारणा, कठिन तपस्या, सत्यसाधना—
अन्तरे
वाहिरे धर्मे कर्मे सकलइ व्रह्मविवर्जित हे॥
धिक्कृत लाञ्छित पृथ्वी
’परे, धूलिविलुण्ठिन्त
सुप्तिभरे—
रुद्र,
तोमार निदारुण वज्रे करो तारे सहसा तर्जित हे॥
पर्वते प्रान्तरे नगरे
ग्रामे जाग्रत भारत व्रह्मेर नामे,
पुण्ये
वीर्ये अभय़े अमृते हइवे पलके सज्जित हे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji e bhaarot lojjito hey, Hinotapanke mojjito hey. Naahi pourush, naahi bicharana, kotthin taposya, sotyosaadhona - Antore baahire dharme karme sakoli bromhobiborjito hey. Dhikkrito laanchhito prithwipare dhuliluntthito suptibhare - Rudro, tomar nidarun bajre karo taare sahosa torjito hey. Parbote praantore nagore graame jaagroto bhaarot bramher naame, Punye birje abhoye amrite hoibe paloke sojjito hey.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Swadesh · 38(স্বদেশ)
- राग
- Bhupali
- ताल
- Tritaal(ত্রিতাল)
- घराना
- Hindustani
- प्रकाशित
- Dharma Sangeet
- स्वरबितान खण्ड
- 47
- स्वरलिपि
- Sarala Debi
- रचनाकाल
- 1900(১৩০৭)
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