आकाशे दुइ हाते प्रेम विलाय़
Akashe dui hate prem
पूजा
आकाशे दुइ हाते प्रेम विलाय़ ओ के! से सुधा छड़िय़े गेल लोके लोके॥ गाछेरा भरे निल सवुज पाताय़, धरणी धरे निल आपन माथाय़। छेलेरा सकल गाय़े निल मेखे, पाखिरा पाखाय़ पाखाय़ निल एँके। छेलेरा कुड़िय़े निल माय़ेर वुके, माय़ेरा देखे निल छेलेर मुखे। से ये ओइ दुःखशिखाय़ उठल ज्वले, से ये ओइ अश्रुधाराय़ पड़ल गले॥ से ये ओइ विदीर्ण वीर-हृदय़ हते वहिल मरणरूपी जीवनस्रोते। से ये ओइ भाङागड़ार ताले ताले नेचे याय़ देशे देशे काले काले॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aakashe dui haate prem bilaay o ke ! Se sudha chhoriye gelo loke loke. Gaachhera bhore nilo sabuj paatay, Dharoni dhore nilo aapon maathay. Chhelera sakal gaaye nilo mekhe, Paakhira paakhay paakhay nilo enke. Chhelera kuriye nilo maayer buke, Maayera dekhe nilo chheler mukhe. Se je oi dukkhoshikhay utthlo jwole, Se je oi oshrudhaaray porlo gole. Se je oi bidirno bir-hridoy hote Bohilo maronrupi jibansrote. Se je oi bhaangagarar taale taale Neche jaay deshe deshe kaale kaale.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 358(পূজা)
- उप-पर्याय
- बिश्व(বিশ্ব)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- संकलन
- गीतिमाल्य(গীতিমাল্য)
- स्थान
- रामगढ़, हिमालय(রামগড়, হিমালয়)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ६०(স্বরবিতান ৬০)
- स्वरलिपि
- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 21 May 1914(৭ জ্যৈষ্ঠ ১৩২১)
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