आमार अङ्गे अङ्गे के वाजाय़ वाँशि
Amar ange ange ke bajay
प्रेम Chitrangada से · दृश्य 3
आमार अङ्गे अङ्गे के वाजाय़ वाँशि। आनन्दे विषादे मन उदासी॥ पुष्पविकाशेर सुरे देह मन उठे पूरे, की माधुरीसुगन्ध वातासे याय़ भासि॥ सहसा मने जागे आशा, मोर आहुति पेय़ेछे अग्निर भाषा। आज मम रूपे वेशे लिपि लिखि कार उद्देशे– एल मर्मेर वन्दिनी वाणी वन्धन नाशि॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamar ange ange ke baajay bnaashi. Aanonde bishadhe mon udasi. Puspobikashero sure Deho mon utthe pure, Ki maadhurisughandho Baatase jaay bhaasi. Sahosa mone jaage aasha, Mor aahuti peyechhe ogniro bhaasa. Aaj mamo rupe bese Lipi likhi kaar uddeshe, Elo mormero bondini baani bandhano naashi.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1936(১৩৪৩)
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