आमार ए घरे आपनार करे
Amar e ghare aponar
पूजा
आमार ए घरे आपनार करे गृहदीपखानि ज्वालो हे।
सव दुखशोक सार्थक होक लभिय़ा तोमारि आलो हे॥
कोणे कोणे यत लुकानो आँधार मिलावे धन्य हय़े,
तोमारि पुण्य-आलोके वसिय़ा सवारे वासिव भालो हे॥
परशमणिर प्रदीप तोमार, अचपल तार ज्योति
सोना क’रे लवे पलके आमार सकल कलङ्क कालो।
आमि यत दीप ज्वालिय़ाछि ताहे शुधु ज्वाला, शुधु काली–
आमार घरेर दुय़ार शिय़रे तोमारि किरण ढालो हे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamar e ghore aapnar kore grihodipkhaani jwaalo hey. Sab dukhoshok saarthok hok lobhiya tomari aalo hey. Kone kone jato lukano aandhar milabe dhonyo hoye, Tomari punyo aaloke bosiya sabare baasibo bhaalo hey. Paroshmonir prodip tomar, achapal taar aalo Sona kore labe paloke aamar sakal kalonko kaalo. Aami jato deep jwaaliyechhi taahe shudhu jwaala, shudhu kaali - Aamar gharer duwar shiyore tomari kiron dhaalo hey.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 - रचनाकाल
- 1901(১৩০৮)
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