आमार की वेदना से कि जानो
Amar ki bedona se ki
प्रेम और प्रकृति
आमार की वेदना से कि जानो ओगो मिता, सुदूरेर मिता। वर्षणनिविड़ तिमिरे यामिनी विजुलि-सचकिता॥ वादल-वातास व्येपे आमार हृदय़ उठिछे केँपे– से कि जानो तुमि जानो। उৎसुक एइ दुखजागरण ए कि हवे वृथा। ओगो मिता, सुदूरेर मिता, आमार भवनद्वारे वोपिले यारे सेइ मालती आजि विकशिता–से कि जानो। यारे तुमिइ दिय़ेछ वाँधि आमार कोले से उठिछे काँदि–से कि जानो तुमि जानो। सेइ तोमार वीणा विस्मृता॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamar ki bedona se ki jaano Ogo mita, sudurer mita. Barshanonibiro timire jaamini bijuli-sachokitaa. Baadolo-baatas byepe aamar hriday utthichhe knepe - Se ki jaano tumi jaano. Utsuk ei dukhojaagoran e ki habe britha Ogo mita, sudurer mita, Aamar bhabonodwaare ropile jaare Sei maaloti aaji bikoshitaa - se ki jaano. Jaare tumi-i diyechho bnaadhi Aamar kole se utthichhe knaadi - se ki jaano tumi jaano. Sei tomar bina bismritaa.
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- प्रेम और प्रकृति · 88(প্রেম ও প্রকৃতি)
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शांतिदेव घोष1910–1999An ashramite of Santiniketan who learnt his songs from Rabindranath himself and travelled with him to Sri Lanka, Java and Bali. Singer, dancer, actor, author and long-serving teacher at Sangit Bhavana.Photographer unknown, 1980 · Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0 - रचनाकाल
- 1935(১৩৪২)
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