आमार लतार प्रथम मुकुल चेय़े
Amar latar pratham mukul
प्रेम
आमार लतार प्रथम मुकुल चेय़े आछे मोर पाने,
शुधाय़ आमारे ‘एसेछि ए कोनखाने’॥
एसेछ
आमार जीवनलीलार रङ्गे,
एसेछ आमार तरल भावेर भङ्गे,
एसेछ आमार स्वरतरङ्ग-गाने॥
आमार लतार प्रथम मुकुल प्रभात-आलोक-माझे
शुधाय़ आमारे ‘एसेछि ए कोन् काजे’।
टुटिते ग्रन्थि काजेर जटिल वन्धे,
विवश चित्त भरिते अलस गन्धे,
वाजाते वाँशरि प्रेमातुर दुनय़ाने॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamar latar prothom mukul cheye aachhe mor paane, Sudhay aamare 'Esechhi e konkhaane'. Esechho aamar jibanolilar range, Esechho aamar tarolo bhaaber bhange, Esechho aamar swarotarongo-gaane. Aamar latar prothom mukul probhat-aalok-maajhe Sudhaay aamare 'Esechhi e kon kaaje'. Tutite gronthi kaajer jotilo bandhe, Bibasho chitto bhorite alos gandhe, Baajate bnaashori prematur dunoyaane.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 31 March 1926(১৭ চৈত্র ১৩৩২)
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