आमार मुक्ति आलोय़ आलोय़
Amar mukti aloy aloy
पूजा
३३९ आमार मुक्ति आलोय़ आलोय़ एइ आकाशे, आमार मुक्ति धुलाय़ धुलाय़ घासे घासे॥ देहमनेर सुदूर पारे हारिय़े फेलि आपनारे, गानेर सुरे आमार मुक्ति ऊर्ध्वे भासे॥ आमार मुक्ति सर्वजनेर मनेर माझे, दुःखविपद-तुच्छ-करा कठिन काजे। विश्वधातार यज्ञशाला, आत्महोमेर वह्नि ज्वाला– जीवन येन दिइ आहुति मुक्ति-आशे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamar mukti aaloy aaloy ei aakashe, Aamar mukti dhulay dhulay ghaase ghaase. Dehomoner sudur paare haariye pheli aaponare, Gaaner sure aamar mukti urdhe bhaase. Aamar mukti sarbojaner moner maajhe, Dukkhobipad-tuchchho-kara kotthin kaaje. Bishwodhaatar jogyoshaala atmohomer bonhi jwaala - Jiban jeno diyi aahuti mukti-aashe.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1926(১৩৩৩)
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