आमि यखन छिलेम अन्ध
Ami jakhan chhilem andho
पूजा
५५४ आमि यखन छिलेम अन्ध सुखेर खेलाय़ वेला गेछे, पाइ नि तो आनन्द॥ खेलाघरेर देय़ाल गेँथे खेय़ाल निय़े छिलेम मेते, भित भेङे येइ एल घरे घुचल आमार वन्ध। सुखेर खेला आर रोचे ना, पेय़ेछि आनन्द॥ भीषण आमार, रुद्र आमार, निद्रा गेल क्षुद्र आमार– उग्र व्यथाय़ नूतन क’रे वाँधले आमार छन्द। ये दिन तुमि अग्निवेशे सव-किछु मोर निले एसे से दिन आमि पूर्ण हलेम घुचल आमार द्वन्द्व। दुःखसुखेर पारे तोमाय़ पेय़ेछि आनन्द॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aami jakhon chhilem andho Sukher khelay bela gechhe paai ni to aanondo. Khelagharer deyal gnethe kheyal niye chhilem mete, Bhit bhenge jei ele ghore ghuchlo aamar bandho. Sukher khela aar roche na peyechhi aanondo. Bhishan aamar, rudro aamar, nidra gelo khudro aamar - Ugro byathaay nutan kore bnaadhle aamar chhando. Je din tumi ognibeshe sob kichu mor nile ese Se din aami purno holem ghuchlo aamar dwondo. Dukkhosukher paare tomay peyechhi aanondo.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 554(পূজা)
- उप-पर्याय
- बौल(বৌল)
- राग
- किर्तन(কীর্তন)
- ताल
- तेयोर(তেওরা)
- घराना
- शास्त्रीय और क्षेत्रीय रूप(শাস্ত্রীয় ও আঞ্চলিক রূপ)
- संकलन
- अरूपरतन(অরূপরতন)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ४२ (अरुप्रतन्)(স্বরবিতান ৪২ (অরূপরতন))
- स्वरलिपि
- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- January 1920(মাঘ ১৩২৬)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।