आय़ रे मोरा फसल काटि
Ay re mora phasal kati
आनुष्ठानिक
१६
आय़ रे मोरा फसल काटि–
फसल काटि, फसल काटि।
माठ आमादेर मिता ओरे, आज तारि सओगाते
मोदेर घरेर आङन सारा वछर भरवे दिने राते॥
मोरा नेव तारि दान, ताइ-ये काटि धान,
ताइ-ये गाहि गान– ताइ-ये सुखे खाटि॥
वादल एसे रचेछिल छाय़ार माय़ाघर,
रोद एसेछे सोनार जादुकर।
ओ से सोनार जादुकर।
श्यामे सोनाय़ मिलन हल मोदेर माठेर माझे,
मोदेर भालोवासार माटि-ये ताइ साजल एमन साजे।
मोरा नेव तारि दान, ताइ-ये काटि धान,
ताइ-ये गाहि गान– ताइ-ये सुखे खाटि॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aay re mora phasal kaati - Phasal kaati, phasal kaati. Maatth aamader mita ore, aaj taari sawogaate Moder gharer aangon saara bachhor bhorbe dine raate. Mora nebo taari daan, taai-je kaati dhaan, Taai-je gaahi gaan - taai-je suhke khaati. Baadol ese rochechhilo chhaayay maayaghar, Rod esechhe sonar jaadukar. Shyame sonay milan holo moder matther maajhe, Moder bhaalobasai maati-je taai saajlo emon saaje. Mora nebo taari daan, taai-je kaati dhaan, Taai-je gaahi gaan, taai-je sukhe khaati.
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- पर्याय
- आनुष्ठानिक · 16(আনুষ্ঠানিক)
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- प्रकाशित
- शन्तिनिकेतन पत्रिक(শান্তিনিকেতন পত্রিকা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ३०(স্বরবিতান ৩০)
- स्वरलिपि
- अनादिकुमार दस्तिदारअनादिकुमार दस्तिदार1903–1974Singer and teacher, and one of the notable propagators of Rabindrasangeet.
- रचनाकाल
- 17 April 1923(৪ বৈশাখ ১৩৩০)
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