अहो! आस्पर्धा एकि तोदेर
Aho aspordha eki
वाल्मीकि प्रतिभा Valmiki Pratibha से · दृश्य 3
अहो आस्पर्धा ए की तोदेर नराधम ! तोदेर कारेओ चाहि ने आर, आर, आर ना रे— दूर दूर दूर,आमारे आर छुँस ने । ए-सव काज आर ना, ए पाप आर ना, आर ना आर ना— त्राहि, सव छाड়िनु ! दीन हीन ए अधम आमि किछुइ जानि ने राजा ! एराइ तो यत वाधाले जञ्जाल, एत करे वोझाइ वोझे ना— की करि, देखो विचारि । वाः— एओ तो वड়ो मजा, वाहवा ! यत कुय়ेर गोड়ा ओइ तो,आरे वल्-ना रे ! दूर दूर दूर,निर्लज्ज आर वकिस ने । ए पाप आर ना, आर ना,आर ना—त्राहि— सव छाड়िनु ।
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aho! Aaspardha e kee toder naradham. Toder kaareo chaahi ne aar, aar, aar ne re - Dur dur dur, aamare aar chnus ne. E-sab kaaj aar na, e paap aar na, Aar na, aar na, traahi - sab chhaarinu.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- वाल्मीकि प्रतिभा · 9(বাল্মীকিপ্রতিভা)
- उप-पर्याय
- बल्मिकि-प्रतिभ(বল্মিকি-প্রতিভ)
- राग
- बेहग(বেহাগ)
- ताल
- त्रिताल(ত্রিতাল)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- संकलन
- बल्मिकि प्रतिभा(বাল্মীকি প্রতিভা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ४९(স্বরবিতান ৪৯)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1886(১২৯৩)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।