अनन्तसागरमाझे दाओ तरी भासाइय़ा
Ananta sagar majhe
प्रेम और प्रकृति
अनन्तसागरमाझे दाओ तरी भासाइय़ा। गेछे सुख, गेछे दुख, गेछे आशा फुराइय़ा॥ सम्मुखे अनन्त रात्रि, आमरा दुजने यात्री, सम्मुखे शय़ान सिन्धु दिग्विदिक हाराइय़ा॥ जलधि रय़ेछे स्थिर, धू-धू करे सिन्धुतीर, प्रशान्त सुनील नीर नील शून्ये मिशाइय़ा। नाहि साड़ा, नाहि शव्द, मन्त्रे येन सव स्तव्ध, रजनी आसिछे धीरे दुइ वाहु प्रसारिय़ा॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Anontosaagoromaajhe daao tori bhaasaiya. Gechhe sukh gechhe dukh, gechhe aasha phuraiya. Sammukhe anonto raatri, aamra dujone jaatri, Sammukhe shayan sindhu digbidig haaraiya. Jalodhi royechhe sthir, dhu dhu kore sindhutir, Proshanto sunil nir nil shunye mishaiya. Naahi saara naahi shabdo, montre jeno sab stabdho, Rajoni aasichhe dhire dui baahu prosariya.
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इंदिरा देवी चौधरनी1873–1960Rabindranath's niece — scholar, translator and musician, who set down a great many of his songs in notation.Photographer unknown, c. 1890 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1882(১২৮৯)
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