अनेक दिनेर आमार ये गान
Anek diner amar je gan
प्रेम
२१
अनेक दिनेर आमार ये गान आमार
काछे फिरे आसे
तारे आमि शुधाइ, तुमि घुरे
वेड़ाओ कोन् वातासे॥
ये फुल गेछे सकल
फेले गन्ध ताहार कोथाय़ पेले,
यार आशा आज शून्य हल की सुर
जागाओ ताहार आशे॥
सकल गृह हारालो यार तोमार ताने
तारि वासा,
यार विरहेर नाइ अवसान तार
मिलनेर आने भाषा।
शुकालो येइ
नय़नवारि तोमार सुरे काँदन तारि,
भोला दिनेर वाहन तुमि स्वपन
भासाओ दूर आकाशे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Anek diner aamar je gaan aamar kaachhe phire aase Tire aami shudhai, tumi ghure berao kon baatase. Ja phul gechhe sakol phele gandho taahar kothay pele, Jaar aasha aaj shunyo holo ki sur jaagao taahar aashe. Sakal griho haaralo jaar tomar taane taari baasa, Jaar biraher naai abosan taar miloner aane bhaasa. Sukalo jei nayonbaari tomar sure knaadon taari, Bhola diner baahon tumi swapon bhaasao dur aakashe.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रेम · 21(প্রেম)
- उप-पर्याय
- गान(গান)
- राग
- देश(দেশ)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ३१(স্বরবিতান ৩১)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1929(১৩৩৬)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।