वाकि आमि राखव ना किछुइ
Baki ami rakhbo na
प्रकृति Basanta से
वनभूमि - वाकि आमि राखव ना किछुइ । तोमार चलार पथे पथे छेय়े देव भुँइ । ओगो मोहन, तोमार उत्तरीय় गन्धे आमार भरे निय়ो, उजाड় करे देव पाय়े वकुल वेला जुँइ । दखिनसागर पार हय়े-ये एले पथिक तुमि । आमार सकल देव अतिथिरे आमि वनभूमि । आमार कुलाय়भरा रय়ेछे गान, सव तोमारेइ करेछि दान, देवार काङाल करे आमाय় चरण यखन छुँइ ।
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Baaki aami raakhbo na kichhui - Tomaar chalar pathe pathe chheye debo bhnui. Ogo mohan, tomaar uttoriyo gandhe aamar bhore niyo, Ujaar kore debo paaye bokul bela jnui. Dokhinsaagor paar hoye-je ele pothik tumi. Aamar sakol debo otithire aami bonobhumi. Aamar kulay bhora royechhe gaan, sab tomaarei korechhi daan - Debar kaangal kore aamay charon jakhon chhnui.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रकृति · 214(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- बसन्त(বসন্ত)
- राग
- खम्बज्-किर्तन(খাম্বাজ-কীর্তন)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- ऋतु
- बरसात(বর্ষা)
- संकलन
- बसन्त(বসন্ত)
- स्थान
- शांतिनिकेतन(শান্তিনিকেতন)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ६ (बसन्त)(স্বরবিতান ৬ (বসন্ত))
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 4 February 1923(২২ মাঘ ১৩২৯)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।