भाङल हासिर वाँध
Bhanglo hasir badh
प्रकृति Basanta से
शालवीथिका - भाङल हासिर वाँध । अधीर हय়े मातल केन पूर्णिमार ओइ चाँद । उतल हाओय়ा क्षणे क्षणे मुकुलछाओय়ा वकुलवने दोल दिय়े याय়, पाताय় पाताय় घटाय় परमाद । घुमेर आँचल आकुल हल की उल्लासेर भरे । स्वपन यत छड়िय়े प'ल दिके दिगन्तरे । आज रातेर एइ पागलामिरे वाँधवे व'ले के ओइ फिरे, शालवीथिकाय় छाय়ा गेँथे ताइ पेतेछे फाँद ।
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Bhaanglo haasir bnaadh. Adheer hoye maatlo keno Purnimar oi chnaad. Utal haawa khane khane, Mukulchhaawa bokulobone Dol diye jaay, pataay pataay Ghatay paromad. Ghumer anchal aakul holo Kee ullaser bhare. Swapon jato chhoriye polo dike digantare. Aaj raater ei paaglamire Bnaadhbe bole ke oi phire, Shaalbeethikay chhaaya gnethe Taai petechhe phnaad.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 2 February 1923(২০ মাঘ ১৩২৯)
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