भोर हल येइ श्रावणशर्वरी
Bhor holo jei
प्रकृति
भोर हल येइ श्रावणशर्वरी तोमार वेड़ाय़ उठल फुटे हेनार मञ्जरी॥ गन्ध तारि रहि रहि वादल-वातास आने वहि, आमार मनेर कोणे कोणे वेड़ाय़ सञ्चरि॥ वेड़ा दिले कवे तुमि तोमार फुलवागाने– आड़ाल क’रे रेखेछिले आमार वनेर पाने। कखन गोपन अन्धकारे वर्षारातेर अश्रुधारे तोमार आड़ाल मधुर हय़े डाके मर्मरि॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Bhor holo jei shraabonoshaarbori Tomaar beray utthlo phute henar manjari. Gandho taari rohi rohi baadol-baatas aane bohi, Aamar moner kone kone beray sanchori. Bera dile kabe tumi tomar phulobaagane - Aaral kore rekhechile aamar boner paane. Kakhon gopano aandhokare barsharaater oshrudhaare Tomar aaral madhur hoye daake marmori.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 30 June 1922(১৬ আষাঢ় ১৩২৯)
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