বিধি ডাগর আঁখি যদি দিয়েছিল
Bidhi dagar akhi
Prem O Prakriti
विधि डागर आँखि यदि दिय़ेछिल
से
कि आमारि पाने भुले पड़िवे ना॥
दुटि अतुल
पदतल रातुल शतदल
जानि ना की लागिय़ा परशे धरातल,
माटिर ’परे तार करुणा माटि हल–से पद मोर पथे चलिवे ना?।
तव कण्ठ-’परे हय़े दिशाहारा
विधि अनेक ढेलेछिल मधुधारा।
यदि ओ मुख मनोरम
श्रवणे राखि मम
नीरवे अतिधीरे भ्रमरगीतिसम
दु कथा वल यदि ‘प्रिय़’ वा ‘प्रिय़तम’ ताहे तो कणा
मधु फुरावे ना।
हासिते सुधानदी उछले निरवधि,
नय़ने भरि उठे अमृतमहोदधि–
एत सुधा केन सृजिल विधि, यदि आमारि
तृषाटुकु पूरावे ना॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Bidhi daagoro aankhi jodi diyechhilo Se ki aamari paane bhule poribe na. Duti atulo padotalo raatulo shatodalo Jaani na kee laagiya paroshe dharatalo, Maatir pore taar koruna maati holo - se pado mor pathe cholibe na ? Tabo kantho-pore hoye dishahara Bidhi anek dhelechhilo modhudhara. Jodi o mukh monoramo shrobane raakhi mamo Neerabe oti dheere bhromarogeetisamo Du katha balo jodi 'Priyo' ba 'Priyotamo', taahe to kana modhu phurabe na. Haasite sudhanodi uchhale nirabadhi, Nayone bhori utthe amritomahodadhi - Eto sudha keno srijilo bidhi, jodi aamari trishatuku purabe na.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Prem O Prakriti · 57(প্রেম ও প্রকৃতি)
- राग
- Bhairavi(ভৈরবী)
- ताल
- Tritaal(ত্রিতাল)
- घराना
- Hindustani
- स्वरबितान खण्ड
- 51
- स्वरलिपि
- Not known
- रचनाकाल
- 1897(১৩০৪)
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