विश्व यखन निद्रामगन, गगन अन्धकार
Biswa jakhon nidramagon
पूजा
विश्व यखन निद्रामगन, गगन अन्धकार,
के देय़ आमार वीणार तारे एमन झङ्कार॥
नय़ने घुम निल केड़े, उठे वसि शय़न छेड़े–
मेले आँखि चेय़े थाकि, पाइ ने देखा तार॥
गुञ्जरिय़ा गुञ्जरिय़ा प्राण उठिल पूरे,
जानि ने कोन् विपुल वाणी वाजे व्याकुल सुरे।
कोन् वेदनाय़ वुझि ना रे हृदय़ भरा अश्रुभारे,
परिय़े दिते चाइ काहारे आपन कण्ठहार॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Bishwo jakhon nidramagon, gagon andhokar, Ke dey aamar beenar taare emon jhankaar. Nayone ghum nilo kere, utthe bosi shayon chhere - Mele aakhi cheye thaaki, paai ne dekhaa taar. Gunjoria gunjoria praan utthilo pure, Jaani ne kon bipul baanee baaje byakul sure. Kon bedonay bujhi naa re hriday bhora oshrubhaare, Poriye dite chaai kaahare aapan kanthohaar.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 / भीमराव शास्त्री - रचनाकाल
- 17 April 1910(৪ বৈশাখ ১৩১৭)
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