चले याय़ मरि हाय़ वसन्तेर दिन
Chole jay mori hay
प्रकृति
चले याय़ मरि हाय़
वसन्तेर दिन।
दूर शाखे पिक डाके
विरामविहीन॥
अधीर समीर-भरे उच्छसि वकुल झरे,
गन्ध-सने हल मन सुदूरे विलीन॥
पुलकित आम्रवीथि
फाल्गुनेरइ तापे,
मधुकरगुञ्जरणे छाय़ातल
काँपे।
केन आजि अकारणे सारा वेला आनमने
पराने वाजाय़ वीणा के गो उदासीन॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Chole jaay mori haay basontero din. Dur shaakhe piko daake biramobihin. Adhiro somiro-bhare uchhwosi bokul jhare, Gandho-sane holo mon sudure bilin. Pulokito aamrobithi phaalguneri taape, Modhukarogunjorane chhaayatalo knaape. Keno aaji akaarone saara bela aanomone Parane baajay bina ke go udasin.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1929(১৩৩৬)
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