दारुण अग्निवाणे रे हृदय़ तृषाय़ हाने रे
Darun agnibane re
प्रकृति
दारुण अग्निवाणे रे हृदय़ तृषाय़ हाने रे॥
रजनी निद्राहीन,
दीर्घ दग्ध दिन
आराम नाहि ये जाने रे॥
शुष्क काननशाखे
क्लान्त कपोत डाके
करुण कातर गाने रे॥
भय़ नाहि, भय़ नाहि। गगने रय़ेछि चाहि।
जानि झञझार वेशे दिवे
देखा तुमि एसे
एकदा तापित प्राणे रे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Daaruno ognibaane re hriday trishay haane re. Rajoni nidrahin, dirgho dagdho din Aaram naahi je jaane re. Shushko kaanonoshaakhe klaanto kapoto daake Koruno kaataro gaane re. Bhoy naahi, bhoy naahi. Gagone royechhi chaahi. Jaani jhanjharo beshe dibe dhekha tumi ese Ekoda taapito praane re.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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