धरा दिय़ेछि गो आमि आकाशेर पाखि
Dhora diyechhi go
प्रेम
५४
धरा दिय़ेछि गो आमि आकाशेर पाखि,
नय़ने देखेछि तव नूतन आकाश॥
दुखानि आँखिर पाते की रेखेछ ढाकि,
हासिले फुटिय़ा पड़े ऊषार आभास॥
हृदय़ उड़िते
चाय़ होथाय़ एकाकी–
आँखितारकार देशे करिवारे वास।
ओइ गगनेते चेय़े उठिय़ाछे डाकि–
होथाय़ हाराते चाय़ ए गीत-उच्छ्वास॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Dhara diyechhi go aami aakasher paakhi, Nayone dekhechhi tabo nutan aakash. Dukhani aankhir paate ki rekhechho dhaaki, Haasile phutiya pare ushar abhas. Hriday urite chaay hothay ekaki - Aankhitaarokar deshe koribare baas. Oi gagonete cheye utthiyachhe daaki - Hotay haarate chaayi e gito-uchchhaas.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1886(১২৯৩)
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