धरणी, दूरे चेय़े केन आज आछिस जेगे
Dharani dure cheye
प्रकृति
धरणी, दूरे चेय़े केन आज आछिस जेगे येन कार उत्तरीय़ेर परशेर हरष लेगे॥ आजि कार मिलनगीति ध्वनिछे काननवीथि, मुखे चाय़ कोन् अतिथि आकाशेर नवीन मेघे॥ घिरेछिस माथाय़ वसन कदमेर कुसुम-डोरे, सेजेछिस नय़नपाते नीलिमार काजल परे। तोमार ओइ वक्षतले नवश्याम दूर्वादले आलोकेर झलक झले परानेर पुलक-वेगे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Dharoni, dure cheye keno aaj aachhis jege Jeno kaar uttoriyer paroser haros lege. Aaji kaar milanogiti dhwonichhe kaanonbithi, Mukhe chaay kon otithi aakaser nobino meghe. Ghirechhis maathay bason kadomer kusumodore, Sejechhis nayonpaate nilimaar kajol pore. Tomar oi bokkhotale naboshyam durbadale Aaloker jhalok jhale paraner pulakbege.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1923(১৩৩০)
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