ध्वनिल आह्वान मधुर गम्भीर प्रभात-अम्वर-माझे,
Dhwanilo ahwan modhur
पूजा
३०३
ध्वनिल आह्वान मधुर गम्भीर प्रभात-अम्वर-माझे,
दिके दिगन्तरे भुवनमन्दिरे शान्तिसङ्गीत वाजे॥
हेरो गो
अन्तरे अरूपसुन्दरे, निखिल संसारे परमवन्धुरे,
एसो आनन्दित मिलन-अङ्गने शोभन मङ्गल साजे॥
कलुष कल्मष
विरोध विद्वेष हउक निर्मल, हउक नि:शेष–
चित्ते होक यत विघ्न अपगत नित्य कल्याणकाजे।
स्वर
तरङ्गिय़ा गाओ विहङ्गम, पूर्वपश्चिमवन्धुसङ्गम–
मैत्रीवन्धनपुण्यमन्त्र-पवित्र विश्वसमाजे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Dhwonilo aahwano modhuro gombhiro probhaato-ambaro-maajhe, Dike digantare bhubanomondire shaantisangeeto baaje. Hero go antore aruposundare nikhilo sangsaare paromobondhure, Eso aanondito milano-angone shobhano mongalo saaje. Kolusho kalmaso birodho bidwesho houk nirmolo houk nihshesho - Chitte hok jato bighno apogato nityo kolyanokaaje. Swaro tarongiya gaao bihangamo, purboposhchimobondhusangamo - Moitribandhanopunyomontro pobitro bishwosamaje.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 303(পূজা)
- उप-पर्याय
- उत्सव(উত্সব)
- राग
- भैरव(ভৈরব)
- ताल
- तेयोर(তেওরা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- प्रकाशित
- प्रोबसि(প্রবাসী)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन १३(স্বরবিতান ১৩)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1925(১৩৩২)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।