দীর্ঘ জীবনপথ, কত দুঃখতাপ
Dirgho jibanpoth
Puja
२५०
दीर्घ जीवनपथ, कत दुःखताप, कत शोकदहन–
गेय़े चलि तवु ताँर करुणार गान॥
खुले रेखेछेन ताँर अमृतभवनद्वार–
श्रान्ति घुचिवे, अश्रु मुछिवे, ए पथेर हवे अवसान॥
अनन्तेर पाने चाहि आनन्देर गान गाहि–
क्षुद्र शोकताप नाहि नाहि रे।
अनन्त आलय़ यार किसेर भावना तार–
निमेषेर तुच्छ भारे हव ना रे म्रिय़माण॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Dirgho jibanopath, kato dukkhotaap, kato shokdahon - Geye choli tobu tnaar korunar gaan. Khule rekhechhen tnaar amritobhabonodwaar - Shraanti ghuchibe, oshru muchhibe, e pather hobe abosan. Antarer paane chaahi aanonder gaan gaahi - Khudro shokotaap naahi naahi re. Ananto aaloy jaar kiser bhaabona taar - Nimesher tuchhyo bhaare habo na re mriyoman.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Puja · 250(পূজা)
- उप-पर्याय
- Aashwas
- राग
- Ashavari
- ताल
- Jhaptaal(ঝাঁপতাল)
- घराना
- Hindustani
- संकलन
- Robichhaya
- स्वरबितान खण्ड
- 8
- स्वरलिपि
- Indira Debi Chowdhurani
- रचनाकाल
- 1885(১২৯২)
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