दुःख ये तोर नय़ रे चिरन्तन
Dukkho je tor noy
पूजा
६१२
दुःख ये तोर नय़ रे चिरन्तन–
पार आछे रे एइ सागरेर
विपुल क्रन्दन॥
एइ जीवनेर व्यथा यत एइखाने सव हवे गत,
चिरप्राणेर आलय़-माझे अनन्त सान्त्वन॥
मरण ये तोर नय़ रे चिरन्तन–
दुय़ार ताहार पेरिय़े
यावि, छिँड़वे रे वन्धन।
ए वेला तोर यदि झड़े पूजार कुसुम झ’रे पड़े,
यावार वेलाय़ भरवे थालाय़ माला ओ चन्दन॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Dukkho je tor noy re chirantan - Paar aache re ei saagorer bipul krandan. Ei jiboner byatha jato eikhane sab hobe gato, Chiropraaner aalay-maajhe anonto swanton. Maron je tor noy re chirantan. Duwar taahar periye jaabi, chhnirbe re bnaadhon. E bela tor jodi jhare pujar kusum jhore pare, Jaabar belay bhorbe thaalay maala o chandan.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1914(১৩২১)
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