দূর রজনীর স্বপন লাগে
Dur rajanir swapan
Bichitra
दूर रजनीर स्वपन लागे आज नूतनेर हासिते,
दूर फागुनेर वेदन जागे आज फागुनेर वाँशिते॥
हाय़ रे से काल हाय़ रे कखन चले याय़ रे
आज ए कालेर मरीचिकाय़ नतुन माय़ाय़ भासिते॥
ये महाकाल दिन फुराले आमार कुसुम झरालो
सेइ तोमारि तरुण भाले फुलेर माला परालो।
शुनिय़े
शेषेर कथा से काँदिय़े छिल हताशे,
तोमार माझे नतुन साजे शून्य आवार भरालो।
आमरा खेला खेलेछिलेम, आमराओ गान गेय़ेछि।
आमराओ पाल मेलेछिलेम, आमरा तरी वेय़ेछि।
हाराय़ नि ता हाराय़ नि, वैतरणी पाराय़ नि–
नवीन चोखेर
चपल आलोय़ से काल फिरे पेय़ेछि॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Dur rajonir swapon laage aaj nutaner haasite, Dur phaaguner bedan jaage aaj phaaguner bnaashite. Haay re se kaal haay re kakhon chole jaay re. Aaj e kaaler morichikay natun maayay bhaasite. Je mahakaal din phurale aamar kusum jharalo Sei tomari torun bhaale phuler maala poralo. Shuniye shesher katha se knaadiye chhilo hatashe, Tomar maajhe natun saaje shunyo aabar bharalo. Aamrao paal melechhilem, aamra tori beyechhi. Haaray ni ta haaray ni boitarani paarai ni - Nobin chokher chapal aaloy se kaal phire peyechhi.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Bichitra · 72(বিচিত্র)
- ताल
- Kaharwa(কাহারবা)
- घराना
- Hindustani
- स्थान
- Shillong
- स्वरबितान खण्ड
- 3
- स्वरलिपि
- Dinendranath Tagore
- रचनाकाल
- 13 May 1927(৩০ বৈশাখ ১৩৩৪)
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